Guruji on Bhagva Dhwaj

यज्ञ शब्द के अनेक अर्थ हैं। व्यक्तिगत जीवन को समर्पित करते हुए समष्टि जीवन को परिपुष्ट करने के प्रयास को ही यज्ञ कहा गया है। सद्गुणरूप अग्नि में अयोग्य, अनिष्ट, अहितकर बातों का होम करना हीं यज्ञ है। श्रद्धामय, त्यागमय, सेवामय, तपस्यामय जीवन व्यतीत करना हीं यज्ञ है। यज्ञ की अधिष्ठात्री देवता अग्नि है। अग्नि का प्रतीक है ज्वाला, और ज्वालाओं का प्रतिरूप है, हमारा परम पवित्र भगवा ध्वज।

There are different meanings of the word yagya. To make sacrifice of personal life for the strengthening of our Ishwar-roopi-samaaj is yagya. To burn unworthy, harmful thoughts in fire is yagya. To spend a devoted austere life marked with selfless service and sacrifice is yagya. The presiding deity of yagya is Fire god. The mascot of Fire god is his flames and the representation of it is our Param Pavitra Bhagva Dhwaj.

Author: Guruji

Source: Guru Dakshina, Jagruti Prakashan, page 5