Guruji on shakha

राष्ट्र की सर्वंकष उन्नति करने के लिए मैं इस संगठन का सदस्य बना हूँ, मुझे अपने जीवन का कुछ भाग नित्य नियम से राष्ट्र देवता के चरणों में समर्पित करना चाहिये। जिस प्रकार मैं प्रतिदिन सोता हूँ, भोजन करता हूँ, और हर क्षण श्वासोच्छवास करता हूँ, ठीक उसी प्रकार मुझे प्रतिदिन समर्पण एवं पूजन भी करना चाहिए। चौबीस घंटो में हम विभिन्न उद्योग करते हैं, कभी आजीविका जुटाते हैं, तो कभी दिल बहलाते रहते हैं। इसमें से कुछ निर्धारित समय हमें राष्ट्र के लिए देना चाहिए। यदि मैं कभी अपने स्वार्थ के लिए उसका उपयोग करूँगा तो वह एक प्रकार से चोरी होगी। यह पद्धति याने अपनी शाखा है।

I have become a part of this organization to work for the development of our nation, I should be devoting a part of my life regularly for this high ideal. The way I take rest daily, eat food daily and breathe continuously, in a similar manner I should do samarpan and pooja also. We pursue different endeavors in 24h like earning for livelihood, pursuing some hobby, from this 24h we should devote some time to the nation. If I spend it for my personal purpose then it is a form of theft. This method of devoting time daily for nation building work is Shakha.

Author: Guruji

Source: Guru Dakshina, Jagruti Prakashan, page 9