संघ की विशेषता

केवल “गर्व से कहो हम हिन्दू हैं” इतना कहना ही पर्याप्त नहीं है। डॉक्टरजी ने एक कदम और आगे रखा और कहा की गर्व से कहनेवाले लोग तो बहुत मिल जाते हैं, पर वे कुछ करते नहीं हैं इस समाज के लिए। तो इस समाज के लिए मै काम करूँगा, सक्रिय बनकर समय दूँगा, एक घंटे से शुरू करूँगा, यही उनकी सबसे अपेक्षा थी। इतना यदि वो मान लेते हैं तो फिर काम करने की अवधि धीरे धीरे, क्रमशः बढ़ती जाती है। यह मेरा देश है, मेरा समाज है। तो इसके लिए कौन काम करेगा? क्या अँगरेज़ या जर्मन करेंगे? नहीं, हमें, इस हिन्दू समाज को ही करना होगा। इस लिए उन्होंने हिंदुस्तान में अपने समाज के प्रति सक्रियता की आवश्यकता सामने रखी।

Author: रज्जु भैया

Source: हमारे रज्जु भैया पृष्ठ 193