मुक्त्सङ्गोऽनहंवादी

मुक्त्सङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः
सिद्धयसिद्धयोर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते

जो कर्ता रागरहित, कर्तृत्वाभिमानसे रहित, धैर्य और उत्साहयुक्त तथा सिद्धि और असिद्धिमें निर्विकार है, वह सात्त्विक कहा जाता है।

Gita 18, 26