विना प्रीतिं

विना प्रीतिं विना नीतिं विना सत्कार्यपद्धतिम्
विना कर्तृत्वशक्तिं च संघो नैव विवर्धते

बिना प्रेम के, बिना नैतिकता के, सत्कार्य पद्धति और कर्तृत्व शक्ति के बिना संगठन का कार्य नहीं बढ़ता।

सुभाषितम् - Page 27